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मान मिटने से विनय जन्म लेती है और विनय से व्यक्तित्व महान बनता है : आचार्य आर्जव सागर
मान मिटने से विनय जन्म लेती है और विनय से व्यक्तित्व महान बनता है :आचार्य आर्जव सागर

दशलक्षण पर्व का दूसरा दिन — उत्तम मार्दव धर्म
बड़ौत से संवाददाता मुकेश जैन की रिपोर्ट।
दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की जा रही है।
आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ने मार्दव धर्म का संदेश देते हुए कहा कि मान मिटने से विनय जन्म लेती है और विनय से व्यक्तित्व महान बनता है।
उन्होंने कहा—जिस प्रकार पानी से भरने के लिए पात्र का झुकना जरूरी है, उसी प्रकार जीवन में अहंकार छोड़कर विनम्र बनने से मनुष्य सद्गुणों से भर जाता है।
दशलक्षण पर्व का यह पावन दिवस सभी को अहंकार त्याग, विनय और आत्मशुद्धि की प्रेरणा दे रहा है।
गुरु आर्जव वाणी—जन-जन की कल्याणी।




