गर्भ में केवल शरीर नहीं, संस्कार भी दीजिए — आचार्य 108 सुनील सागर
गर्भ में केवल शरीर नहीं, संस्कार भी दीजिए — आचार्य 108 सुनील सागर

गर्भ मे केवल शरीर नहीं, संस्कार भी दीजिए — आचार्य 108 सुनील सागर
इंदौर। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।आचार्य आदिसागर अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश चार्य चक्रवर्ती परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महामुनिराज ने भावी पीढ़ी के निर्माण में संस्कारों के महत्व पर प्रेरणादायी संदेश दिया।
आचार्य श्री ने कहा कि गर्भ में केवल शरीर का निर्माण नहीं होता, बल्कि संस्कारों की नींव भी रखी जाती है। माता-पिता के विचार, भावनाएं, व्यवहार और वातावरण का प्रभाव आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक चिंतन, धार्मिक संस्कार, अच्छे विचार और शांत वातावरण को महत्व देना चाहिए।
उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि अपने भावों से आने वाली पीढ़ी को एक नया और संस्कारित आकार दें। केवल भौतिक सुविधाएं देना ही माता-पिता का दायित्व नहीं है, बल्कि बच्चों को अच्छे संस्कार, सदाचार, करुणा, संयम और मानवीय मूल्यों से जोड़ना भी आवश्यक है।
इस संदेश का उद्देश्य परिवारों में संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा भावी पीढ़ी को श्रेष्ठ विचारों से जोड़ना है। आर्यिका विजयमति विमेंस फेडरेशन (भारत) की ओर से भी इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संदेश:
*“गर्भ में केवल शरीर नहीं, संस्कार दीजिए; अपने भावों से आने वाली पीढ़ी को एक नया आकार दीजिए।”*


