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छत्तीसगढ़

पंडरीपानी चोरीकांड में पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल चोरी का माल खरीदने वाले पर कार्रवाई कब

तीन आरोपी गिरफ्तार चोरी की कुछ संपत्ति बरामद शेष सामान की बरामदगी और कथित खरीदार पर कार्रवाई को लेकर पत्रकारों ने एसपी से की शिकायत

जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ थाना बिलाईगढ़। ग्राम पंडरीपानी में 18 अगस्त 2026 को हुई चोरी के मामले में बिलाईगढ़ पुलिस द्वारा तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के कथित मेमोरेंडम के आधार पर चोरी की संपत्ति का एक हिस्सा बरामद किया गया है, जबकि चोरी के शेष सामान की बरामदगी अभी बाकी बताई गई है।

 

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रार्थी श्रवण कुमार रात्रे के मकान से सोने-चांदी के जेवरात चोरी हुए थे। मामले में सुमित कुमार लहरे देवा रात्रे और मनीष कुमार महिलांगे को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से 9 नग सोने के फर माला की पत्तियां एक चांदी का पायल 5 तोला चांदी का माला एक मोबाइल फोन तथा 4 हजार रुपये नकद बरामद करने की जानकारी दी है।

 

पुलिस के अनुसार चोरी के सामान में से कुछ जेवर आरोपी देवा रात्रे ने अपने मामा मनीष महिलांगे को देने की बात कही थी। पुलिस ने मनीष महिलांगे के कब्जे से कथित चोरी की संपत्ति बरामद करने का उल्लेख करते हुए उसके विरुद्ध धारा 317 बीएनएस के तहत कार्रवाई की है।

इधर, चोरी की घटना और पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति को लेकर बिलाईगढ़ के पत्रकारों ने 29 अगस्त को पुलिस अधीक्षक जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के नाम लिखित आवेदन सौंपा है। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि चोरी के मामले में कुछ संपत्ति बरामद हुई है, लेकिन चोरी के शेष सामान की बरामदगी अब तक नहीं हुई है। साथ ही चोरी की संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

 

पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि चोरी के शेष सामान को बरामद किया जाए तथा चोरी की संपत्ति खरीदने अथवा उसे अपने कब्जे में रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

आखिर शेष चोरी का माल कहां है

पुलिस के अनुसार चोरी में करीब 11 ग्राम सोना और 85 तोला चांदी शामिल थी। इसमें से 9 नग फर माला एक चांदी का पायल 5 तोला चांदी का माला और 4 हजार रुपये बरामद होने की जानकारी दी गई है। वहीं पुलिस के अनुसार सोने के अन्य आभूषण कान के टॉप्स नाक की फुली तथा चांदी के अन्य जेवरों की बरामदगी शेष है।

 

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि चोरी का शेष माल आखिर कहां गया क्या चोरी के जेवर किसी अन्य व्यक्ति को बेचे गए यदि बेचे गए तो उनकी खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई पत्रकारों ने इन्हीं सवालों को लेकर पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि चोरी का सामान किसी व्यक्ति ने खरीदा या अपने कब्जे में रखा था, तो उसकी भूमिका की पूरी जांच क्यों नहीं हुई

 

जानकारी के अनुसार चोरी के सामान को खरीदने वाला कथित साहूकार जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। चर्चा है कि पुलिस उसे पूछताछ के लिए बिलाईगढ़ थाना लेकर आई थी और करीब 4 से 6 घंटे तक थाने में बैठाए रखने के बाद छोड़ दिया गया। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

 

यही घटनाक्रम अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है यदि उक्त व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध नहीं थी तो उसे थाना क्यों लाया गया और यदि उसकी भूमिका संदिग्ध थी तो पूछताछ के बाद उसे छोड़ने का आधार क्या था क्या उसके पास चोरी की संपत्ति पहुंची थी क्या उससे कोई बरामदगी हुई क्या उसका बयान दर्ज किया गया

क्या प्रभावशाली व्यक्ति का है संरक्षण

पत्रकारों ने अपने आवेदन में यह भी सवाल उठाया है कि यदि चोरी की संपत्ति को अपने कब्जे में रखने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है तो चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच क्यों नहीं की जा रही है। क्या इस मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव है, अथवा किसी प्रकार के लेनदेन के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई है—यह फिलहाल जांच का विषय है।

हालांकि इन सवालों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी राजनेता या पुलिस अधिकारी पर दबाव अथवा लेनदेन का आरोप अभी सिद्ध नहीं हुआ है। पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाने तथा दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और पंडरीपानी चोरीकांड में चोरी के शेष सामान की बरामदगी के साथ-साथ कथित खरीदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है या नहीं।

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