तीर्थों की मर्यादा और संतों की सुरक्षा पर आकर्षक झांकियों ने दिया जागरूकता का संदेश, युवाओं को मोबाइल एवं वाणी संयम की प्रेरणा
तीर्थों की मर्यादा और संतों की सुरक्षा पर आकर्षक झांकियों ने दिया जागरूकता का संदेश, युवाओं को मोबाइल एवं वाणी संयम की प्रेरणा

उत्तम संयम धर्म की आराधना से गूंजा नेमी नगर, आचार्य श्री सुनीलसागर जी ने दिया आत्मसंयम का संदेश
तीर्थों की मर्यादा और संतों की सुरक्षा पर आकर्षक झांकियों ने दिया जागरूकता का संदेश, युवाओं को मोबाइल एवं वाणी संयम की प्रेरणा
इंदौर। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)। दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर नेमी नगर जैन कॉलोनी में सोमवार को उत्तम संयम धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ की गई। परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। दिनभर धर्मसभा, आध्यात्मिक साधना एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
प्रातःकालीन बेला में आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव के सान्निध्य में आध्यात्मिक साधना एवं अध्यात्म योग का आयोजन हुआ। गुरुदेव ने आत्मचिंतन, इंद्रिय संयम तथा मन, वचन और काया पर नियंत्रण रखने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर साधना के माध्यम से आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।
तीर्थों की मर्यादा और संतों की सुरक्षा पर आकर्षक झांकियां
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘तीर्थ की मर्यादा और संतों की सुरक्षा’ विषय पर प्रस्तुत आकर्षक झांकियां रहीं। विभिन्न दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता बनाए रखने, धार्मिक स्थलों की मर्यादा का पालन करने तथा साधु-संतों की सुरक्षा एवं सम्मान के प्रति समाज की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया।
झांकियों के माध्यम से बताया गया कि तीर्थ केवल दर्शन एवं पर्यटन के स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। उनकी पवित्रता और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक श्रद्धालु का कर्तव्य है। साथ ही संतों के विहार, साधना एवं धर्मप्रभावना के दौरान उनकी सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया। इन प्रस्तुतियों ने बच्चों, युवाओं एवं श्रद्धालुओं को धार्मिक मूल्यों, संयम, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ने की प्रेरणा दी।
मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
इसके पश्चात सनमति प्राकृत विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने मनमोहक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विद्यार्थियों की भक्तिपूर्ण प्रस्तुति से धर्मसभा में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक उल्लासमय हो उठा।
संयम केवल नियम नहीं, आत्मा को साधने का मार्ग : आचार्य श्री
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव ने उत्तम संयम धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि संयम केवल बाहरी नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि अपने भीतर उत्पन्न होने वाले राग-द्वेष, क्रोध, मान और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना है। मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है, जब उसकी इंद्रियां विषय-वासनाओं के पीछे भागने के बजाय आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होती हैं।
गुरुदेव ने प्रेरित किया कि संयम मनुष्य को भोग से योग, असंयम से आत्मअनुशासन और बाहरी आकर्षण से आत्मचिंतन की ओर ले जाता है। आत्मसंयम के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों, व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
युवाओं को दिया मोबाइल और वाणी संयम का संदेश
आचार्य श्री ने विशेष रूप से युवाओं एवं बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि संयम का अभ्यास जीवन की छोटी-छोटी आदतों से प्रारंभ किया जा सकता है। समय का सदुपयोग, मोबाइल का सीमित उपयोग, वाणी में मधुरता, भोजन में संयम तथा अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण आत्मसंयम की मजबूत नींव बनाते हैं।
उन्होंने जीवन में अनुशासन और आत्मचिंतन अपनाने की प्रेरणा देते हुए बताया कि छोटे-छोटे प्रयास ही व्यक्ति को संयमित जीवन की ओर आगे बढ़ाते हैं।
संध्याकालीन आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
संध्याकालीन बेला में आरती एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को धर्ममय एवं उत्साहपूर्ण बना दिया। दिनभर चले धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की आराधना करते हुए आत्मचिंतन, साधना एवं धर्मलाभ प्राप्त किया।
दशलक्षण महापर्व के इस पावन अवसर पर नेमी नगर में आयोजित कार्यक्रमों ने संयम, आत्मअनुशासन, तीर्थों की मर्यादा और संतों के सम्मान का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।




