उत्तम क्षमा की आराधना में नन्हे साधकों ने जगाई धर्म-संस्कारों की अलख
उत्तम क्षमा की आराधना में नन्हे साधकों ने जगाई धर्म-संस्कारों की अलख

उत्तम क्षमा की आराधना में नन्हे साधकों ने जगाई धर्म-संस्कारों की अलख
घाटोल। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)। धर्मप्राण नगरी घाटोल में चल रहे चातुर्मास के दौरान पर्यूषण महापर्व के प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म की आराधना का आध्यात्मिक शुभारंभ हुआ। पूज्य आर्यिका श्री प्रशममति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में अर्हं ध्यान योग के साथ श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक साधना की।
इस अवसर पर बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए उपवास का संकल्प लिया और एक घंटे की मौन साधना की। मौन साधना के दौरान बच्चे जप में लीन रहे तथा आत्मशांति और आध्यात्मिक एकाग्रता का अनुभव किया। बच्चों की धार्मिक सहभागिता ने आयोजन में विशेष आध्यात्मिक वातावरण बना दिया।
प्रवचन में आर्यिका श्री प्रशममति माताजी ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का मार्ग है। मनुष्य को क्रोध, मान और अहंकार का त्याग कर क्षमा का भाव धारण करना चाहिए। दूसरों की भूलों को क्षमा करने के साथ अपनी भूलों को स्वीकार कर उनमें सुधार करना ही उत्तम क्षमा धर्म की वास्तविक साधना है।
माताजी ने कहा कि क्षमा का भाव मन को शांति प्रदान करता है और व्यक्ति को आत्मा की ओर अग्रसर करता है। पर्यूषण महापर्व आत्मचिंतन, संयम और आत्मशुद्धि का अवसर है। इस दौरान प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के विकारों को दूर कर क्षमा, संयम और सद्भावना के भावों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।




