अनंत चतुर्दशी पर भव्य महा मस्तकाभिषेक, छह शांतिधाराओं सहित पांच वेदियों पर हुआ अभिषेक
अनंत चतुर्दशी पर भव्य महा मस्तकाभिषेक, छह शांतिधाराओं सहित पांच वेदियों पर हुआ अभिषेक

पार्श्वनाथ भगवान के जयघोष से गूंजा सिंगोली
अनंत चतुर्दशी पर भव्य महा मस्तकाभिषेक, छह शांतिधाराओं सहित पांच वेदियों पर हुआ अभिषेक
सिंगोली। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।
दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी एवं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के अवसर पर सिंगोली की धर्मभूमि श्रद्धा और भक्ति से सराबोर नजर आई। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मूलनायक श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य महा मस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। अभिषेक के दौरान गूंजते मंत्रोच्चार और भगवान के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में समाजजनों ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।
बगड़ा परिवार को प्रथम अभिषेक का सौभाग्य
मूलनायक श्री पार्श्वनाथ भगवान पर प्रथम महा मस्तकाभिषेक एवं प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य भामाशाह परिवार नन्दलाल जी, चांदमल जी, सूरजमल जी, पदम कुमार जी, सुरेश कुमार जी, पारस कुमार जी एवं कैलाशचन्द्र जी बगड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।
वहीं द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य प्रेमचंद्र जी एवं लोकेश कुमार जी साकुण्या परिवार, तृतीय शांतिधारा सुनील कुमार जी एवं संस्कार जी सेठिया परिवार, चतुर्थ शांतिधारा राजेन्द्र कुमार जी एवं पारस कुमार जी मोहिवाल परिवार, पंचम शांतिधारा लादुलाल जी, अशोक कुमार जी एवं हितेश कुमार जी ठग परिवार तथा छठी शांतिधारा का सौभाग्य सुरेश जी बगड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।
अन्य वेदियों पर भी उमड़ी आस्था
मंदिर की अन्य पांच वेदियों पर भी समाजजनों ने श्रद्धापूर्वक अभिषेक एवं शांतिधारा कर धर्मलाभ लिया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की मंदिर में आवाजाही शुरू हो गई थी। विधि-विधान, पूजन और मंत्रोच्चार के बीच मंदिर परिसर में पूरे समय आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
कटंगी से पधारे बालब्रह्मचारी अरुण भैय्या के निर्देशन में मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा सम्पन्न कराई गई। इसके पश्चात संगीतमय नित्य पूजन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
“आत्मा में लीन होना ही उत्तम ब्रह्मचर्य”
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए बालब्रह्मचारी अरुण भैय्या ने कहा कि अपनी शुद्ध आत्मा में लीन रहना, मन-वचन-काय से संयम रखना, इन्द्रियों पर नियंत्रण करना तथा सांसारिक इच्छाओं, राग-द्वेष एवं बाहरी आकर्षणों का त्याग कर वास्तविक आत्मस्वरूप को पहचानना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य केवल बाहरी संयम का विषय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, इन्द्रिय-निग्रह और अपने वास्तविक स्वरूप की ओर लौटने की आध्यात्मिक साधना है।
धर्ममय हुआ नगर, समाज ने लिया पुण्यार्जन
दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर समाजजनों ने उत्साहपूर्वक अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा में सहभागिता की। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल पूजा-अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयम, आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का संदेश देने वाला आध्यात्मिक अवसर भी बना।
धर्मनगरी सिंगोली में दशलक्षण महापर्व का समापन भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति, अभिषेक की पवित्र धारा और उत्तम ब्रह्मचर्य के आध्यात्मिक संदेश के साथ हुआ।




