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हाईवे सुरक्षा व्यवस्था पर मंडराया संकट, यातायात थाने में बल बढ़ाने के फैसले को लेकर उठे सवाल

फुनगा हाईवे सुरक्षा चौकी का बल यातायात थाने में संलग्न, एसपी के आदेश पर उठे सवाल

अनूपपुर। जिले की यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक द्वारा 17 अगस्त 2026 को जारी किए गए एक आदेश ने पुलिस महकमे के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश में यातायात हाईवे सुरक्षा चौकी फुनगा में पदस्थ समस्त बल को, उप निरीक्षक आनंद तिवारी को छोड़कर, तत्काल प्रभाव से थाना यातायात अनूपपुर में पदस्थ किए जाने का उल्लेख है।

पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जिले में यातायात व्यवस्था के सुचारु एवं प्रभावी संचालन तथा उपलब्ध बल की कमी को देखते हुए फुनगा हाईवे सुरक्षा चौकी के बल को यातायात थाना अनूपपुर में पदस्थ किया जा रहा है। आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि इस बल का उपयोग पूरे जिले में यातायात व्यवस्था के प्रभावी संचालन, यातायात नियंत्रण, सड़क सुरक्षा एवं आवश्यकता अनुसार अन्य यातायात संबंधी ड्यूटी में किया जाए।

हाईवे सुरक्षा चौकी खाली तो हाईवे की सुरक्षा कौन करेगा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फुनगा क्षेत्र में हाईवे सुरक्षा के लिए अलग से चौकी स्थापित है, तो वहां से लगभग पूरा बल हटाकर यातायात थाने में संलग्न करने के बाद हाईवे की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था किसके भरोसे रहेगी?

फुनगा क्षेत्र में पूर्व में भी गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के दौरान पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य किए जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में हाईवे सुरक्षा चौकी के बल को हटाने का निर्णय सड़क सुरक्षा के लिहाज से कितना प्रभावी होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

यातायात थाने में बल बढ़ाने की जरूरत या कुछ और?

आदेश में बल की कमी को इसका प्रमुख आधार बताया गया है। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि यातायात थाने में अचानक अतिरिक्त बल उपलब्ध कराने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई और इस फैसले से वास्तविक रूप से किस व्यवस्था को मजबूत किया जाना है?

जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर यातायात पुलिस के लिए अलग थाना और यातायात प्रभारी का उल्लेख है। ऐसे में फुनगा जैसी हाईवे सुरक्षा चौकी से बल हटाकर यातायात थाने में लगाने के फैसले ने पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है।

क्या यातायात व्यवस्था के नाम पर चालानी कार्रवाई बढ़ेगी?

आम नागरिकों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि अतिरिक्त बल का इस्तेमाल यातायात नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के लिए होगा या मुख्य रूप से चालानी कार्रवाई तक सीमित रहेगा। पुलिस का आधिकारिक दायित्व सड़क सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, इसलिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए पदस्थ बल की ड्यूटी का स्वरूप क्या रहता है। अनूपपुर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट भी नियम विरुद्ध वाहन चलाने वालों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई को पुलिस की गतिविधियों में शामिल बताती है।

यातायात प्रभारी पर लगे पुराने आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच

यातायात विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में लगाए गए अवैध वसूली के आरोपों की चर्चा भी इस फैसले के बाद फिर तेज हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती और इन्हें तथ्य के रूप में नहीं बल्कि आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। ऐसे में यदि पूर्व में किसी अधिकारी या कर्मचारी पर इस तरह की शिकायतें हुई हैं, तो पुलिस प्रशासन को उनकी निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

एसपी की मंशा पर सवाल, जवाबदेही भी जरूरी

पुलिस अधीक्षक के आदेश में स्पष्ट रूप से बल की कमी, यातायात नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को आधार बनाया गया है। लेकिन फुनगा हाईवे सुरक्षा चौकी से लगभग पूरा बल हटाकर यातायात थाने में लगाने के बाद यह सवाल स्वाभाविक है कि हाईवे सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसके कंधों पर होगी?

यदि यातायात व्यवस्था को मजबूत करना ही उद्देश्य है तो इसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। वहीं यदि हाईवे सुरक्षा प्रभावित होती है तो इस फैसले की समीक्षा भी जरूरी होगी।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि फुनगा हाईवे सुरक्षा चौकी के बल को यातायात थाने में लगाने के बाद जिले में यातायात व्यवस्था वास्तव में कितनी सुधरती है और सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर इसका क्या असर पड़ता है।

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