मस्तूरी के कुटेला में मनरेगा में 14 लाख से ज्यादा के गबन का आरोप JCB से काम और फर्जी हाजिरी का आरोप ग्रामीण करेंगे कलेक्टर से शिकायत
बिलासपुर। मस्तूरी जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत कुटेला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में 14 लाख से अधिक के गबन का बड़ा आरोप सामने आया है। ग्रामीणों ने रोजगार सहायक शशिप्रभा कुर्रे पर फर्जी मस्टररोल, फर्जी दस्तावेज और मशीनों से काम कराकर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में शिकायत तैयार कर ली गई है और जल्द ही कलेक्टर बिलासपुर, जनपद पंचायत CEO मस्तूरी, SDM मस्तूरी सहित मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।
एक ही डबरी पर तीन बार राशि आहरण का आरोप
शिकायत के मुताबिक ग्राम के ही अंजोर सिंह नेताम पिता गनपत के नाम पर एक ही जमीन पर 3 डबरी दिखाकर अलग-अलग वर्षों में राशि निकाली गई। वर्ष 2021 में 2,44,000 रुपये, वर्ष 2025 में 2,84,000 रुपये और वर्ष 2026 में 1,98,000 रुपये का आहरण कर गबन किया गया।

इसी तरह कोमल प्रसाद पिता मनीराम की निजी भूमि पर फर्जी तरीके से 2025 में 2,00,000 रुपये निकाले जाने कोमल के भाई के नाम पर 1,98,000 रुपये और इसरावी जवाहर और भागवत के नाम पर 1,98,000 से 2,00,000 रुपये तक फर्जी मस्टररोल के जरिए निकाले जाने का आरोप है।
हरियाली तालाब बना ही नहीं पैसा निकल गया
ग्रामीणों का आरोप है कि हरियाली तालाब के नाम पर 19/06/2026 से कार्य प्रारंभ दिखाकर 2,00,000 रुपये का फर्जी मस्टररोल तैयार किया गया, जबकि मौके पर हरियाली तालाब के नाम पर कोई कार्य हुआ ही नहीं है और किसी भी मजदूर को रोजगार नहीं दिया गया।
14.67 लाख के चेक डैम में JCB और फर्जी हाजिरी
वर्तमान में चल रहे कार्य जिसका प्रारंभ दिनांक 26/06/2026 है और स्वीकृत राशि 14,67,000 रुपये है, जो दैहान तालाब सीसी चेक डैम के लिए स्वीकृत है उसमें भी अनियमितता का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य को JCB और मिक्सर मशीन से कराया जा रहा है जो मनरेगा के नियमों के विरुद्ध है और मजदूरों का हक छीनने जैसा है। मशीन से 15 दिन में कार्य पूरा कर बाहर कमाने गए व्यक्तियों के नाम पर फर्जी हाजिरी डाली जा रही है जबकि डैम का कोई एस्टीमेट तक नहीं बना है।

सोशल ऑडिट में शिकायत नहीं सुनी 112 की धमकी
इस मामले में ग्राम कुटेला निवासी शैलेन्द्र कुमार घृतलहरे का वीडियो बाइट भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने वही बातें कही हैं जो शिकायत में लिखी हैं। उनका आरोप है कि दिनांक 06/08/2026 को हुए मनरेगा सोशल ऑडिट के दौरान जब उन्होंने शिकायत दर्ज कराने और सवाल पूछने की कोशिश की तो उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई और पंचायत की रोजगार सहायक द्वारा 112 पुलिस बुलाने की धमकी दी गई।
शैलेन्द्र का कहना है कि इससे गांव में भय का माहौल बन गया है और सोशल ऑडिट की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा हो रहा है।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच मस्टररोल और भुगतान अभिलेखों के सत्यापन और दोषी कर्मचारी पर दण्डात्मक कार्रवाई की मांग की है।





