आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव के सानिध्य में पार्श्वनाथ धाम का शिलान्यास संपन्न
आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव के सानिध्य में पार्श्वनाथ धाम का शिलान्यास संपन्न

आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव के सानिध्य में पार्श्वनाथ धाम का शिलान्यास संपन्न
इंदौर।(संवाददाता मुकेश कुमार जैन )परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी गुरुदेव के पावन सानिध्य में अतिशय क्षेत्र पार्श्वनाथ धाम के शिलान्यास का पावन एवं ऐतिहासिक समारोह श्रद्धा, समर्पण और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि यह केवल किसी भवन या मंदिर का शिलान्यास नहीं, बल्कि एक नए युग का पावन आह्वान है। प्रभु पारसनाथ के चरणों में किया गया सच्चा समर्पण और दान आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था एवं संस्कारों की मजबूत नींव बनेगा।
गुरुदेव ने कहा कि ईंट और पत्थर केवल निमित्त हैं, वास्तविक नींव विश्वास, श्रद्धा और समर्पण की होती है। जब दानदाताओं के हाथ उदारता से खुलते हैं, तभी इतिहास का निर्माण होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं की भावना की सराहना करते हुए कहा कि संसार में अनेक लोग ऐसे हैं, जिनकी क्षमता करोड़ों खर्च करने की होती है, किंतु वे लाखों में भी हिसाब करने लगते हैं। वहीं इस पावन भूमि का सौभाग्य है कि यहां हजार की क्षमता रखने वाला श्रद्धालु भी पांच हजार की हिम्मत और उदारता दिखा रहा है। त्याग और दान की महत्ता समझाते हुए आचार्य श्री ने प्रकृति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब वसंत ऋतु ने वृक्षों से मांगा, तो वृक्षों ने अपने पत्ते तक दे दिए, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हीं वृक्षों पर नए और असंख्य पत्ते पुनः आ गए। इसी प्रकार सच्चे मन से किया गया त्याग और दान कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि अनेक गुना होकर जीवन में लौटता है।शिलान्यास समारोह श्रद्धा, समर्पण, त्याग और विश्वास का अनुपम संगम बना। प्रभु पारसनाथ के जयकारों के बीच उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनते हुए धर्मकार्य में अपना सहयोग एवं सहभागिता व्यक्त की। पार्श्वनाथ धाम का यह शिलान्यास केवल निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास की उस मजबूत नींव का प्रतीक है, जिस पर आने वाले समय में धर्म, संस्कृति और आस्था का भव्य इतिहास रचा जाएगा।




