आचार्य श्री सुनील सागर जी ने बंदियों को दिलाया व्यसन एवं अपराधमुक्त जीवन का संकल्प
आचार्य श्री सुनील सागर जी ने बंदियों को दिलाया व्यसन एवं अपराधमुक्त जीवन का संकल्प

जेल में गूंजा आत्म-सुधार का संदेश
आचार्य श्री सुनील सागर जी ने बंदियों को दिलाया व्यसन एवं अपराधमुक्त जीवन का संकल्प
इंदौर। (संवाददाता मुकेश जैन)। आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज ससंघ ने विशेष आमंत्रण पर जेल परिसर पहुंचकर बंदी भाइयों को आत्म-सुधार, संयम और सकारात्मक जीवन का प्रेरणादायी संदेश दिया। दोपहर 3 बजे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में आचार्य श्री के ओजस्वी प्रवचनों ने बंदियों के साथ जेल अधिकारियों एवं उपस्थित समाजजनों को भी प्रभावित किया।
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों से बदलता है। व्यक्ति यदि दृढ़ संकल्प कर ले तो जीवन की दिशा बदल सकता है। जेल में रहना जीवन का अंत नहीं, बल्कि स्वयं को सुधारने और नई शुरुआत करने का अवसर है। उन्होंने प्रेरणा दी कि बंदी जब जेल से बाहर निकलें तो समाज और परिवार उन्हें बदले हुए, जिम्मेदार और संस्कारित व्यक्ति के रूप में स्वीकार करे।
प्रवचन से प्रभावित बंदी भाइयों ने एकाग्रता से आचार्य श्री के विचार सुने और अपनी जिज्ञासाएं रखीं। इस दौरान उन्होंने व्यसन से दूर रहने तथा अपराधमुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया। जेल अधिकारियों ने भी माना कि आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी संदेश बंदियों के व्यवहार और जीवनचर्या में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मांगलिक क्रियाओं के साथ हुआ स्वागत
विशेष आयोजन को लेकर जेल परिसर को रंगोली, वंदनवार एवं आकर्षक सजावट से सजाया गया था। आचार्य श्री के प्रवेश पर पाद प्रक्षालन की मांगलिक क्रिया सपना गोधा, हिना गोधा एवं अनुज गोधा द्वारा संपन्न की गई। चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन जेल अधिकारियों के साथ सुनील गोधा, कमल अग्रवाल, इन्द्र कुमार सेठी एवं प्रदीप जैन बड़जात्या ने किया।
यह आयोजन पुलकमंच के श्री सुनील गोधा एवं चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक श्री इन्द्र कुमार सेठी के संयुक्त प्रयासों से अल्प समय में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदीप जैन बड़जात्या, कमल अग्रवाल, सपना गोधा, हिना गोधा, आशय गोधा (लड्डू), अनुज गोधा, चिराग गोधा, एडवोकेट रोहित जैन, अभिषेक अजमेरा एवं अभिषेक पाटौदी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री आलोक अभिसक्ता जैन द्वारा बंदी भाइयों के लिए राशि देने की घोषणा की गई, जिस पर उपस्थितजनों ने उनका आभार व्यक्त किया। अंत में जेल अधीक्षक ने आचार्य श्री एवं ससंघ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बंदियों को आत्मचिंतन और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देते हैं।
आचार्य श्री के संदेश ने जेल की दीवारों के भीतर केवल धर्म की गूंज नहीं पहुंचाई, बल्कि आत्मसुधार, संयम, व्यसनमुक्ति और अपराधमुक्त जीवन की नई उम्मीद भी जगाई।



