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क्षणभर का मजा, जीवनभर की सजा—क्षणिक सुख से बचें : आचार्य श्री सुनील सागरजी

क्षणभर का मजा, जीवनभर की सजा—क्षणिक सुख से बचें : आचार्य श्री सुनील सागरजी

क्षणभर का मजा, जीवनभर की सजा—क्षणिक सुख से बचें : आचार्य श्री सुनील सागरजी

साधु-साध्वियों का केशलोंच संपन्न, संयम और वैराग्य का दिया संदेश

इंदौर। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)। नेमी नगर जैन कॉलोनी में चातुर्मासरत आचार्य श्री 108 सुनील सागरजी महाराज ने प्रवचन में क्षणिक सुख और आकर्षण से बचने की प्रेरणा देते हुए कहा कि “एक मिनट की रील का सुख सदियों का बंधन ला सकता है।” उन्होंने कहा कि शॉर्टकट का रास्ता कई बार जीवन को दलदल में ले जाता है। नाव में छोटा-सा छेद भी उसे डुबो देता है, उसी प्रकार संसार की आसक्ति आत्मा को मोक्षमार्ग से दूर कर सकती है।

आचार्य श्री ने कहा कि “क्षणभर का मजा, जीवनभर की सजा” बन सकता है। क्रोध, आवेश अथवा आकर्षण में लिया गया एक गलत निर्णय लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों में विवेक नहीं खोना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसार का सुख क्षणिक है। मनुष्य को अस्थायी सुख के पीछे भागने के बजाय आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना चाहिए। आसक्ति बढ़ने के साथ आत्मकल्याण का मार्ग दूर होता जाता है।

इस अवसर पर मुनि श्री संविज्ञ सागरजी, मुनि श्री सम्प्रभ सागरजी, मुनि श्री संपूज्य सागरजी, मुनि श्री सुविवेक सागरजी महाराज तथा आर्यिका सुस्वरमति माताजी, आर्यिका संबलमती माताजी एवं आर्यिका सुलेखमति माताजी का केशलोंच संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया।

आचार्य श्री ने कहा कि क्षणिक आकर्षण के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जो जीवनभर का बंधन बन जाए। विवेक, संयम और धर्म का मार्ग ही जीवन को सार्थक दिशा देता है।

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