ब्रह्मचर्य मनुष्य को नर से नारायण बनने की दिशा में ले जाने वाला श्रेष्ठ धर्म, इन्द्रिय संयम से आत्मबल होता है जागृत
ब्रह्मचर्य मनुष्य को नर से नारायण बनने की दिशा में ले जाने वाला श्रेष्ठ धर्म, इन्द्रिय संयम से आत्मबल होता है जागृत

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म ने दिया आत्मशुद्धि और संयम का संदेश, आचार्य श्री सुनीलसागर जी ने बताया ब्रह्मचर्य का आध्यात्मिक महत्व
ब्रह्मचर्य मनुष्य को नर से नारायण बनने की दिशा में ले जाने वाला श्रेष्ठ धर्म, इन्द्रिय संयम से आत्मबल होता है जागृत
इंदौर। (संवाददाता मुकेश जैन)।
दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ की गई। परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने ब्रह्मचर्य धर्म का भावपूर्वक स्मरण एवं आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य केवल इन्द्रियों का संयम नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का मार्ग है। जब मनुष्य विषय-वासनाओं से ऊपर उठकर आत्मस्वरूप में स्थित होने का प्रयास करता है, तब उसके जीवन में आत्मबल, संयम और आध्यात्मिक चेतना का जागरण होता है।
उन्होंने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला व्यक्ति अपने जीवन को विकारों से बचाते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ता है। “उत्तम ब्रह्मचर्य मन लावे, नरसुर सहित मुक्ति फल पावें”—यह संदेश जीवन में ब्रह्मचर्य की सर्वोच्च आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है।
धर्मसभा में यह भी संदेश दिया गया कि ब्रह्मचर्य का वास्तविक स्वरूप केवल बाहरी नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों की शुद्धता, दृष्टि की निर्मलता, व्यवहार में मर्यादा और आत्मा के प्रति जागरूकता ही सच्चे ब्रह्मचर्य की पहचान है।
दशलक्षण महापर्व के इस पावन अवसर पर नेमी नगर जैन कॉलोनी का वातावरण भक्ति, साधना और धर्ममय भावनाओं से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर आचार्य श्री के मंगल प्रवचन का श्रवण किया और धर्मलाभ अर्जित किया।
समर्पित — श्री सुनील सागर युवा संघ भारत
श्री दिगंबर जैन समाज नेमी नगर (जैन कॉलोनी, इंदौर) इन्द्रपुरी चातुर्मास उत्सव 2026




