घाटोल नगरी में बह रही संयम, तप और त्याग की गंगा, 50 से अधिक महिला-पुरुष 10 उपवास की साधना में लीन
आर्यिका श्री प्रशममति माताजी के पावन सान्निध्य में 12 साधक कर रहे 16 उपवास की कठिन तपस्या
घाटोल। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।
धर्मनगरी घाटोल में इन दिनों संयम, तप और त्याग की अनुपम धारा प्रवाहित हो रही है। आर्यिका श्री प्रशममति माताजी के पावन सान्निध्य में पूरा नगर धर्ममय एवं तपोमय वातावरण से सराबोर है। यहां बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं आत्मकल्याण की भावना के साथ तप आराधना में लीन हैं।
घाटोल नगरी में 50 से अधिक महिला-पुरुष साधक 10 उपवास की साधना कर रहे हैं, वहीं 12 साधक 16 उपवास की कठिन तपस्या में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। साधकों की यह तप आराधना श्रद्धा, आत्मबल, संयम और त्याग का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
जैन धर्म में तप को आत्मशुद्धि एवं कर्मनिर्जरा का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उपवास की साधना के माध्यम से साधक आत्मकल्याण, इंद्रिय संयम और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर हैं। यह साधना केवल आहार त्याग तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, वैराग्य और जीवन में संयम को आत्मसात करने का संदेश भी देती है।
आर्यिका श्री प्रशममति माताजी के पावन सान्निध्य में घाटोल की पावन धरा पर तप, त्याग और धर्माराधना का विशेष वातावरण बना हुआ है। तपस्वियों की साधना धर्मप्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। साधकों की दृढ़ साधना से नगर में आध्यात्मिक उत्साह और धर्म के प्रति श्रद्धा का संचार हो रहा है।
घाटोल नगरी में तप और त्याग की यह पावन धारा आत्मकल्याण, संयम और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दे रही है।
तप की जय हो! त्याग की जय हो! संयम की जय हो!
🌸 जैनम जयतु शासनम्, वन्दे विद्यासागरम्। 🙏




