शॉर्टकट की चाह में लॉन्ग टर्म सुकून न खोएं—आचार्य श्री सुनीलसागर
शॉर्टकट की चाह में लॉन्ग टर्म सुकून न खोएं—आचार्य श्री सुनीलसागर

शॉर्टकट की चाह में लॉन्ग टर्म सुकून न खोएं—आचार्य श्री सुनीलसागर
नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।
इंदौर। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन )आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ने कहा कि संसार का सुख क्षणिक, जबकि आत्मिक आनंद शाश्वत है। तत्काल सुख के लिए अपनाया गया शॉर्टकट कहीं दीर्घकालीन शांति और आत्मकल्याण न छीन ले।
उन्होंने कहा—“इस दुनिया के शॉर्टकट में तू लॉन्ग टर्म सुकून कमा।” संसार के संबंध और सुविधाएं स्थायी नहीं हैं; आत्मा और कर्म ही सदैव साथ रहते हैं।
जब जीवन का “सर्वर डाउन” होगा
आचार्य श्री ने कहा कि जैसे सर्वर डाउन होने पर कनेक्टिविटी समाप्त हो जाती है, वैसे ही जीवन समाप्त होने पर व्यक्ति अकेला जाता है। कोई संबंध, व्यक्ति या सुविधा साथ नहीं जाती।
इसलिए लक्ष्य क्षणिक सुख नहीं, बल्कि आत्मा के स्थायी आनंद की ओर बढ़ना होना चाहिए।
कर्मों से बचना संभव नहीं
उन्होंने कहा कि जैसे बच्चा अपने घर लौटता है, वैसे ही कर्म भी अपने कर्ता के पास लौटते हैं। मनुष्य को अपने कर्मों का फल स्वयं भुगतना पड़ता है। इसलिए आत्मचिंतन और सदाचार आवश्यक हैं।
आत्मिक आनंद ही वास्तविक लक्ष्य
संसार का सुख सीमित है, जबकि आत्मा का आनंद अनंत। इसलिए क्षणिक सुख के बजाय शांति, संतोष और मोक्षमार्ग देने वाला जीवन चुनें।
“क्षणिक सुख के पीछे मत भागो, सही कर्म ही अनंत सुख का आधार बनाएं।”



