उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर गुरुदेव का मंगलमय प्रवचन, कैलाश विजयवर्गीय ने किए गुरु दर्शन
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर गुरुदेव का मंगलमय प्रवचन, कैलाश विजयवर्गीय ने किए गुरु दर्शन

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर गुरुदेव का मंगलमय प्रवचन, कैलाश विजयवर्गीय ने किए गुरु दर्शन

ब्रह्मचर्य केवल बाहरी संयम नहीं, मन-वचन-काय को आत्मस्वरूप में स्थिर करने की साधना : आचार्य सुनीलसागर जी
इंदौर। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।
दशलक्षण महापर्व के अंतिम एवं अत्यंत महत्वपूर्ण धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य की आराधना नेमी नगर जैन कॉलोनी में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई। परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री 108 सुनीलसागर जी गुरुदेव के पावन सान्निध्य में दिनभर विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रातःकालीन मंगल बेला में अध्यात्म योग के माध्यम से साधकों को साधना, आत्मचिंतन एवं अंतर्मुखी होने की प्रेरणा दी गई। इसके पश्चात धर्मसभा में गुरुदेव ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के आध्यात्मिक स्वरूप पर मंगलमय प्रवचन प्रदान किया।
गुरुदेव ने कहा कि ब्रह्मचर्य केवल बाहरी संयम का नाम नहीं है, बल्कि मन, वचन और काय को विषय-विकारों से हटाकर आत्मा में स्थिर करने की साधना है। जब जीव बाहरी आकर्षणों और विषय-वासनाओं से ऊपर उठकर अपने निज स्वरूप की ओर उन्मुख होता है, तभी ब्रह्मचर्य का वास्तविक भाव प्रकट होता है। ब्रह्मचर्य आत्मशुद्धि, संयम और आत्मानुभूति की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कैलाश विजयवर्गीय ने किए गुरुदेव के दर्शन
दोपहर में स्वाध्याय का आयोजन हुआ। इसी दौरान मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश जी विजयवर्गीय ने नेमी नगर जैन कॉलोनी पहुंचकर आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव के दर्शन किए। उन्होंने गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया तथा उनके प्रति अपनी श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त किया।
शंका-समाधान में जिज्ञासाओं का किया समाधान
संध्याकालीन बेला में गुरुदेव के श्रीमुख से शंका-समाधान कार्यक्रम आयोजित हुआ। श्रद्धालुओं ने धर्म, साधना एवं आत्मकल्याण से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं गुरुदेव के समक्ष रखीं, जिनका उन्होंने सहज, सरल एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समाधान प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में गुरुदेव की मंगलमय आरती संपन्न हुई। पूरे दिन नेमी नगर जैन कॉलोनी का वातावरण भक्ति, संयम, साधना और आत्मचिंतन के भावों से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के माध्यम से आत्मसंयम एवं आत्मशुद्धि का संकल्प लिया।




