उंगली उठाना आसान, गिरते हुए को संभालना कठिन : आचार्य श्री सुनीलसागरजी गुरुदेव
उंगली उठाना आसान, गिरते हुए को संभालना कठिन : आचार्य श्री सुनीलसागरजी गुरुदेव

उंगली उठाना आसान, गिरते हुए को संभालना कठिन : आचार्य श्री सुनीलसागरजी गुरुदेव
नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर। (संवाददाता मुकेश जैन)
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी गुरुदेव ने प्रवचन में कहा कि किसी व्यक्ति पर उंगली उठाना बहुत आसान है, लेकिन किसी को उठाने के लिए उसकी उंगली थाम लेना बेहद कठिन है। संसार में दूसरों की कमियां निकालने और आलोचना करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन आवश्यकता उन लोगों की है, जो गिरते हुए व्यक्ति को संभालने के लिए उसका हाथ थाम सकें।
गुरुदेव ने कहा कि किसी की प्रतिष्ठा, आर्थिक स्थिति, व्यवहार अथवा चरित्र पर टिप्पणी करने से पहले व्यक्ति को अपने व्यवहार और चरित्र का भी आत्मावलोकन करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अच्छी दिशा में आगे बढ़ते हुए छोटी-सी भूल कर दे अथवा किसी शुभ कार्य में कोई कमी रह जाए, तो उसकी आलोचना करने वाले तुरंत सामने आ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति कमजोर पड़ रहा हो अथवा गलत दिशा में जा रहा हो, तब उसकी आलोचना करने के बजाय उसे संभालने का प्रयास करना चाहिए। जब हम केवल दूसरों की कमियां देखते हैं तो दूरियां बढ़ती हैं, जबकि विशेषताओं को देखने और अच्छाइयों को प्रोत्साहित करने से आत्मीयता बढ़ती है। अच्छाइयों को प्रोत्साहन देने से अच्छाइयां बढ़ती हैं, जबकि निरंतर बुराइयों की चर्चा करने से नकारात्मकता बढ़ती है।
प्रेम ने बदल दिया युवक का जीवन
प्रवचन के दौरान तपस्वी सम्राट द्वारा सुनाया गया एक प्रेरक प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। एक युवक गलत संगति में पड़कर इतना बिगड़ गया था कि वह माता-पिता की बात भी नहीं मानता था। परिवार ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसके व्यवहार में परिवर्तन नहीं आया।
बहन के विवाह के अवसर पर परिवार ने उसे विवाह में नहीं बुलाने का निर्णय लिया। वहीं उसके दादाजी स्वयं उस स्थान पर पहुंचे, जहां युवक अपने मित्रों के साथ था। दादाजी को देखकर युवक ने अपना मुंह छिपाने का प्रयास किया। दादाजी समझ गए कि उसके मन में आज भी बड़ों के प्रति सम्मान और संकोच बाकी है।
उन्होंने मित्रों के सामने युवक को अपमानित करने के बजाय उसे प्रेमपूर्वक बाहर बुलाकर समझाया। युवक ने कहा कि आपने मेरे मित्रों के सामने मेरा अपमान नहीं किया, इसलिए आज से मैं भी आपका मान रखूंगा। दादाजी के प्रेमपूर्ण व्यवहार का युवक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा और उसने बुरी संगति तथा गलत आदतों को छोड़ दिया।
गुरुदेव ने संदेश दिया कि किसी की गलती पर उंगली उठाने के बजाय यदि हम प्रेम, करुणा और आत्मीयता से उसका हाथ थाम लें, तो संभव है कि हम किसी का जीवन बदलने का माध्यम बन जाएं।



