दश लक्षण महापर्व में शास्त्र स्वाध्याय, चतुर्दशी पर क्षमावाणी में समाजजनों ने परस्पर मांगी क्षमा
दश लक्षण महापर्व में शास्त्र स्वाध्याय, क्षमावाणी में समाजजनों ने परस्पर मांगी क्षमा

सिंगोली में धर्म और संस्कारों की बयार, आदिनाथ जिनालय में विविध धार्मिक आयोजन
दश लक्षण महापर्व में शास्त्र स्वाध्याय, जिनेंद्र भक्ति एवं संस्कार कक्षाओं से बना आध्यात्मिक माहौल; चतुर्दशी पर क्षमावाणी में समाजजनों ने परस्पर मांगी क्षमा

सिंगोली। (संवाददाता मुकेश कुमार जैन)।
नगर के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दश लक्षण महापर्व के पावन अवसर पर धर्म, ज्ञान, संस्कार एवं संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिल रहा है। मुंबई से पधारे विद्वान पंडित अनिल जी एवं खड़ेरी से पधारे शास्त्री नमन भाई जी के निर्देशन एवं सान्निध्य में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जा रहा है।
प्रातःकाल, दोपहर एवं रात्रि में नियमित रूप से शास्त्र स्वाध्याय कराया जा रहा है। विद्वानों द्वारा जैन आगम, धर्म के सिद्धांतों एवं आत्मकल्याण के मार्ग को सरल और सहज रूप में समझाया जा रहा है। स्वाध्याय के माध्यम से समाजजनों को धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को समझने तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा मिल रही है।
इसके साथ ही मंदिर परिसर में जिनेंद्र भक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं बच्चों के लिए विशेष धार्मिक संस्कार एवं ज्ञान की कक्षाएं भी आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में धार्मिक संस्कारों के साथ जैन धर्म, संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति रुचि और जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
चतुर्दशी पर भावपूर्ण क्षमावाणी कार्यक्रम
दश लक्षण महापर्व के दौरान आज चतुर्दशी के अवसर पर दोपहर में शास्त्र स्वाध्याय के उपरांत क्षमावाणी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाजजनों ने आत्मचिंतन करते हुए आपसी मनमुटाव एवं वैमनस्य को दूर करने का संकल्प लिया तथा एक-दूसरे से अपनी भूलों के लिए क्षमा याचना की।
श्रद्धालुओं ने परस्पर “मिच्छामि दुक्कडम्” कहकर जाने-अनजाने में मन, वचन एवं कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगी और सभी के प्रति मैत्रीभाव रखने का संदेश दिया। क्षमावाणी के इस भावपूर्ण आयोजन से मंदिर परिसर में आत्मीयता, सद्भाव एवं आध्यात्मिक शांति का वातावरण बना रहा।
प्रातःकाल से रात्रि तक चल रहे इन धार्मिक आयोजनों से संपूर्ण जैन समाज में भक्ति, ज्ञान, उत्साह एवं आध्यात्मिक चेतना का वातावरण बना हुआ है। समाजजनों का कहना है कि विद्वान पंडित अनिल जी एवं शास्त्री नमन भाई जी का मार्गदर्शन सभी के लिए अत्यंत लाभकारी एवं प्रेरणादायी है। उनके द्वारा कराया जा रहा शास्त्र स्वाध्याय बच्चों, युवाओं एवं वरिष्ठजनों को धर्म को समझने तथा उसे व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दे रहा है।
दश लक्षण महापर्व के इन आयोजनों के माध्यम से सिंगोली का श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर धर्म, ज्ञान, संस्कार और आत्मचिंतन का केंद्र बना हुआ है। यहां श्रद्धालु जिनेंद्र भक्ति के साथ शास्त्र स्वाध्याय, धार्मिक संस्कार एवं आत्मशुद्धि की साधना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।




